
Poonachi � Arthat Katha Ek Kali Bakari ki
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विधि का विधान ही कहिये कि एक वृद्ध दम्पति को ब्रह्मांड से नवजात बकरी उपहार में मिलती है। और यूँ शुरू हो जाती है एक नन्ही सी अनाथ काली बकरी पूनाची की कथा।
पूनाची नाम की एक बकरी की कथा जंगल से होते हुए गाँव तक आ पहुँचती है, आज़ादी और मातृत्व के कोमल-कटु अनुभवों के रास्तों से होकर गुज़रती है। इस कथा में पूनाची की हैरान और निर्दोष आँखों के ज़रिये दुनिया देखते हुए हम अपने डर, अपनी कसक और अपनी ही गहराइयों से रूबरू होते हैं। पूनाची का जीवन जिजीविषा का एक ऐसा अद्भुत उदाहरण है जो हर जीव में मौजूद होता है।
अपने उपन्यास ‘मधोरुबगन’ पर प्रतिबंध और विवाद के बाद पेरुमल मुरुगन ने एक लेखक के तौर पर खुद की मौत की घोषणा की थी। पूनाची के गहरे संजीदा और शक्तिशाली लेखन के साथ उसी लेखक का पुनर्जन्म हुआ है, जिसकी बेबाक और बेख़ौफ कलम को शांत नहीं किया जा सकता।
- AuthorPerumal Murugan
- I S B N9789389152111
- LanguageEnglish
- Product StatusEnabled
- Product TypeNew
- PublisherEka




















